Seva Sanskar
हमारी संस्कृति, हमारा गौरव
भारतीय संस्कृति

सेवा संस्कार-समर्पणम्

सेवा केवल कार्य नहीं, बल्कि एक भावना है। संस्कार हमें जीवन की दिशा देते हैं और समर्पण हमें हर कार्य को पूर्ण निष्ठा से करने की प्रेरणा देता है।

सुन्दर युवा मंच का प्रथम और प्रमुख उद्देश्य सेवा है। यह मंच भारतवर्ष के पूज्य दिगम्बर जैन संतों के प्रति श्रद्धा, विनय और कर्तव्यभाव को जागृत करते हुए उनकी विहार-यात्राओं, साधना स्थलों एवं आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान करने के लिए समर्पित है। मंच का प्रयास है कि प्रत्येक युवा संतों की सेवा को अपना सौभाग्य समझे तथा उनके सुरक्षित, निर्बाध और सम्मानपूर्ण साधना-पथ में सहभागी बने। संतों की सेवा के माध्यम से समाज में करुणा, सहयोग और धर्मनिष्ठा के संस्कारों का प्रसार ही सुन्दर युवा मंच का मूल लक्ष्य है।

सुन्दर युवा मंच केवल एक संगठन नहीं, बल्कि जैन संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक आदर्शों का वाहक है। इसका उद्देश्य युवाओं में संयम, शील, विनम्रता, अनुशासन और धर्म के प्रति समर्पण जैसे श्रेष्ठ संस्कारों का विकास करना है। पूज्य जैन मुनिराजों के जीवन से प्रेरणा लेकर युवा पीढ़ी आत्मोन्नति, चरित्र निर्माण और समाजोत्थान के मार्ग पर अग्रसर हो सके, यही मंच की भावना है। संस्कारयुक्त युवा ही धर्म, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार बन सकते हैं।

सुन्दर युवा मंच का तीसरा आधार स्तंभ समर्पण है। यह मंच पूज्य जैन संतों की साधना, तपस्या और आत्मकल्याण की महान यात्रा में सहयोगी बनने का संकल्प लेकर कार्य करता है। मंच के सदस्य तन, मन और समय के माध्यम से संतों की सुरक्षा, संरक्षण और साधना-सहयोग के लिए समर्पित रहते हैं, ताकि उनकी आध्यात्मिक साधना किसी भी प्रकार की बाधा से प्रभावित न हो। समर्पण की इसी भावना से प्रेरित होकर सुन्दर युवा मंच सेवा, संस्कार और साधना के पवित्र लक्ष्य को जन-जन तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास कर रहा है.
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परिचय

सुन्दर युवा मंच का उद्देश्य

परम पूज्य तपस्वी आचार्य श्री 108 सुन्दर सागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद एवं प्रेरणा से संचालित सुन्दर युवा मंच एक समर्पित युवा संगठन है, जिसका उद्देश्य युवाओं को धर्म, संस्कार, सेवा एवं संगठन से जोड़ना है। मंच जैन धर्म के शाश्वत सिद्धांतों—अहिंसा, संयम, सत्य, करुणा एवं आत्मकल्याण—का प्रचार-प्रसार करते हुए युवा पीढ़ी में नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करता है। आधुनिक युग में युवा शक्ति को धर्म एवं संस्कृति से जोड़ते हुए, सुन्दर युवा मंच एक संस्कारित, संगठित, जागरूक एवं सशक्त समाज के निर्माण हेतु निरंतर कार्यरत है। 🙏🏻✨

"सेवा हमारा धर्म, संस्कार हमारी पहचान और समर्पण हमारा संकल्प।" 🌿✨

500+

Members

Introduction
उद्देश्य

सेवा, संस्कार और समर्पण के साथ समाज को नई दिशा देना।

आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज
परम पूज्य

आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज

परम पूज्य तपस्वी आचार्य श्री 108 सुन्दर सागर जी महाराज के पावन मार्गदर्शन में सुन्दर युवा मंच निरंतर सेवा, संस्कार और समर्पण के पथ पर अग्रसर है। उनकी करुणामयी प्रेरणा और दिव्य आशीर्वाद से यह मंच युवाओं को धर्म की राह पर ले जाने का पवित्र कार्य कर रहा है।

धर्म ही जीवन का आधार है — सेवा, संस्कार और समर्पण से जीवन सार्थक बनता है।
आर्यिका सुलक्ष्यमती माता जी
परम पूज्य

आर्यिका सुलक्ष्यमती माता जी

आर्यिका सुलक्ष्यमती माता जी की ममतामयी छत्रछाया में मंच के समस्त सदस्य करुणा, विनम्रता और सेवाभाव के उच्च आदर्शों को जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं। उनके आशीर्वाद से युवा शक्ति धर्म और संस्कृति की रक्षा में सदा तत्पर रहती है।

करुणा और सेवा ही सच्चे धर्म का स्वरूप है।
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साधु-संतों के विहार के समय आगे minimum (2 stop) और पीछे minimum (2 stop) विहार करवाना होगा।

साधु-संतों के आहार एवं पढ़गाहन के समय पब्लिक और व्यवस्था को शांतिपूर्वक नियंत्रित करना।

आहार चर्या के समय सभी युवा निरंतराय आहार करवाने का प्रयास करेंगे एवं जहां पर चौके की व्यवस्था नहीं होगी वहां पर मंच के अंतर्गत चौके की व्यवस्था करेंगे।

साधु-साध्वियों के आवास, सुरक्षा एवं आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

प्रत्येक कार्यक्रम में मंच की निर्धारित T-shirt एवं Cap पहनना अनिवार्य रहेगा।

प्रत्येक धार्मिक कार्यक्रम एवं सेवा कार्य की फोटो एवं जानकारी Group में Share की जाएगी प्रभावना हेतु।

जहाँ कहीं भी साधु-संतों की निंदा अथवा उनके प्रति अनुचित व्यवहार हो, वहाँ उसका शांतिपूर्वक विरोध एवं समर्थन किया जाएगा।

प्रत्येक वर्ष अधिवेशन में सभी का आना अवश्यक होगा।

सभी सदस्यों की Attendance Maintain की जाएगी तथा लगातार निष्क्रिय रहने वाले Members को मंच से हटाया जा सकता है।

विहार के समय साधु संतों के लिए प्रशासन (police) की व्यवस्था करवाना!

मंच के प्रत्येक सदस्य का व्यवहार विनम्र, अनुशासित एवं धर्म के अनुरूप होना चाहिए।

मंच का प्रत्येक सदस्य समाज, धर्म एवं गुरुभक्ति की भावना से सेवा करेगा।